कीव/मॉस्को: रूस-यूक्रेन युद्ध के 12वें महीने में प्रवेश करते ही युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। लाखों लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं, हजारों नागरिक मारे गए हैं और बुनियादी सुविधाओं का विनाश हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से 80 लाख से अधिक लोग यूक्रेन छोड़कर भाग गए हैं, जिनमें से 40 लाख से अधिक लोग पड़ोसी देशों में शरण ले रहे हैं। युद्ध के कारण 50 लाख से अधिक लोग यूक्रेन के भीतर विस्थापित हुए हैं।
युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भोजन, पानी, आश्रय और चिकित्सा सहायता की भारी कमी है। कई शहरों में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि युद्ध के कारण यूक्रेन में 20 लाख से अधिक लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों में राहत पहुंचाने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने एक आपातकालीन राहत योजना शुरू की है, जिसके तहत 1.7 बिलियन डॉलर की सहायता की आवश्यकता है।
हालांकि, रूस ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में बाधा डाली है। रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर हवाई हमले किए हैं, जिससे राहत कार्य में बाधा उत्पन्न हुई है।
रूस-यूक्रेन युद्ध का मानवीय संकट गहराता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को युद्धग्रस्त क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
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