नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को एक बड़ा एलान करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लोकसभा चुनाव से पहले पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। यह घोषणा उन्होंने दिल्ली में एक कार्यक्रम में करते हुए की।
शाह ने कहा, “CAA देश के लिए एक महत्वपूर्ण कानून है और यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। हम इस कानून को जल्द से जल्द पूरे देश में लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
उन्होंने कहा कि CAA के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी।
शाह ने कहा कि CAA किसी भी भारतीय नागरिक के अधिकारों को छीनने वाला नहीं है। यह कानून केवल उन लोगों को नागरिकता देने के लिए है जो धार्मिक उत्पीड़न के कारण अपने देशों से भागकर भारत आए हैं।
CAA को लेकर देश में काफी विरोध प्रदर्शन हुए थे। कई लोगों का मानना है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण है।
हालांकि, शाह ने कहा कि CAA किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल मानवता के आधार पर बनाया गया है।
विपक्ष ने की आलोचना
विपक्षी दलों ने अमित शाह की घोषणा की आलोचना की है। कांग्रेस ने कहा कि CAA एक भेदभावपूर्ण कानून है और यह भारत के संविधान के खिलाफ है।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “CAA एक असंवैधानिक कानून है और यह भारत की विविधता को नष्ट कर देगा। हम इस कानून का विरोध करते हैं और इसे लागू होने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।”
CAA के बारे में
नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को 11 दिसंबर 2019 को संसद द्वारा पारित किया गया था। यह कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान करता है।
CAA को लेकर देश में काफी विरोध प्रदर्शन हुए थे। कई लोगों का मानना है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण है।
