चूराचंदपुर, मणिपुर: मणिपुर के चूराचंदपुर में शुक्रवार, 16 फरवरी को भारी तनाव देखा गया, जब एक सिर हवलदार को हथियारबंद लोगों के साथ वीडियो में देखने के बाद निलंबित करने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त (डीसी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालयों पर हमला कर दिया। इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई और लगभग 30 लोग घायल हो गए। कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई और वाहनों को आग लगा दी गई। इस घटना के बाद जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं पांच दिनों के लिए निलंबित कर दी गई हैं।
हालात का जायजा
- हिंसा: रिपोर्टों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई और लगभग 30 लोग घायल हो गए। कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई और वाहनों को आग लगा दी गई।
- इंटरनेट बंद: चूराचंदपुर जिले में 16 फरवरी से शुरू होकर पांच दिनों के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
- सुरक्षा: कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है।
पृष्ठभूमि
- विरोध प्रदर्शनों का कारण: एक सिर हवलदार को हथियारबंद लोगों के साथ वीडियो में देखे जाने के बाद उसे निलंबित करने के विरोध में ये प्रदर्शन शुरू हुए।
- आंतरिक तनाव: यह घटना मणिपुर में लंबे समय से चले आ रहे जातीय और आदिवासी तनावों के बीच हुई है, जिसमें कुकी-जो समुदाय पुलिस द्वारा उनके गांवों पर हमलों में कथित संलिप्तता का विरोध कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने इंटरनेट बंद को लेकर नाराजगी व्यक्त की है, जिससे उन्हें सूचना तक पहुंचने और स्वतंत्र रूप से संवाद करने में बाधा आ रही है। उनका कहना है कि सरकार को बातचीत के जरिए मामले को सुलझाना चाहिए था, न कि हिंसा का सहारा लेना चाहिए।
आगे क्या?
यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और तनाव को कैसे कम करती है। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण है कि इस संवेदनशील विषय पर चर्चा करते समय विभिन्न दृष्टिकोणों का सम्मान किया जाए और गलत सूचना या भड़काऊ भाषा फैलाने से बचा जाए।