मौसम के रखवाले ‘इन्सैट-3डीएस’ के लिए उलटी गिनती शुरू, कल शाम होगा प्रक्षेपण!

चेन्नई: मौसम की सटीक भविष्यवाणी और आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाने वाले उपग्रह ‘इन्सैट-3डीएस’ के प्रक्षेपण की उलटी गिनती आज, यानी 16 फरवरी से ही शुरू हो गई है। इसरो के सबसे तगड़े रॉकेट ‘जीएसएलवी-एफ14’ की मदद से इसे कल, 17 फरवरी को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित शार-रेंज से शाम 5:35 बजे अंतरिक्ष में छोड़ा जाएगा।

मिशन की खास बातें:

  • मिशन का नाम: जीएसएलवी-एफ14/इन्सैट-3डीएस
  • उपग्रह का काम: नवीनतम तकनीक से लैस ‘इन्सैट-3डीएस’ मौसम की बेहतर भविष्यवाणी, तूफान और बाढ़ जैसे प्राकृतिक आपदाओं की सटीक पूर्वसूचना देने में सक्षम होगा।
  • प्रक्षेपण का समय: 17 फरवरी, शाम 5:35 बजे
  • प्रक्षेपण स्थल: आंध्र प्रदेश का श्रीहरिकोटा स्थित शार-रेंज
  • प्रक्षेपण वाहन: जीएसएलवी-एफ14 (इसरो का सबसे भारी रॉकेट)

कैसे होगा प्रक्षेपण?:

  • उलटी गिनती के बाद तीन चरणों वाले रॉकेट में ईंधन भरा जाएगा।
  • प्रक्षेपण के करीब 19 मिनट बाद 51.7 मीटर लंबा और 420 टन वजन वाला रॉकेट उपग्रह को पृथ्वी से 170 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में स्थापित कर देगा।
  • इसके बाद कुछ और क्रियाविधियों के जरिए उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

देश के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?:

  • इन्सैट-3डीएस के सफल प्रक्षेपण के बाद भारत की मौसम विज्ञान और आपदा प्रबंधन क्षमता और मजबूत होगी।
  • सटीक मौसम पूर्वानुमान और समय पर चेतावनी से फसल उत्पादन, मछली पकड़ने और आपदा राहत कार्यों में काफी मदद मिलेगी।
  • यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।

अगले कुछ घंटे इसरो और अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए रोमांचक साबित होने वाले हैं। हम उम्मीद करते हैं कि यह मिशन पूरी तरह से सफल होगा और इन्सैट-3डीएस आने वाले सालों में भारत की सुरक्षा और विकास में अहम भूमिका निभाएगा।

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