असम सरकार ने रद्द किया मुस्लिम मैरिज और तलाक एक्ट, बाल विवाह पर लगेगी रोक
मुख्य बातें:
- असम सरकार ने 89 साल पुराने असम मुस्लिम विवाह और तलाक निबंधन अधिनियम, 1935 को रद्द कर दिया है।
- यह कदम बाल विवाह पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- अब, सभी विवाह विशेष विवाह अधिनियम के तहत होंगे।
- कैबिनेट ने मणिपुरी को चार जिलों में सह-आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी।
- मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान-नोगोरिया को मंजूरी दी गई।
- असम इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग अथॉरिटी (एआईएफए) के तहत 274 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।
विवरण:
- असम सरकार ने राज्य में निवासरत मुस्लिम नागरिकों के विवाह और तलाक के पंजीकरण से जुड़े 89 साल पुराने कानून को रद्द करने का निर्णय लिया है।
- यह निर्णय मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में लिया गया।
- सीएम सरमा ने कहा कि यह कदम बाल विवाह पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- अब, सभी विवाह विशेष विवाह अधिनियम के तहत होंगे।
- कैबिनेट ने राज्य के चार जिलों कछार, करीमगंज, हैलाकांडी और होजई में मणिपुरी को एक सहयोगी आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता देने के लिए असम राजभाषा (संशोधन) विधेयक, 2024 को मंजूरी दे दी।
- कैबिनेट ने शहरी महिला उद्यमियों के रूप में महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के सदस्यों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान-नोगोरिया के दिशानिर्देशों को भी मंजूरी दी है।
- इसके साथ ही कैबिनेट ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए कुल आवंटित बजट में से असम इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग अथॉरिटी (एआईएफए) के तहत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 274 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
अंतिम टिप्पणी:
असम सरकार का यह निर्णय बाल विवाह पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कदम राज्य में महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने में भी मदद करेगा।