सियासी ड्रामा चालू है-हिमाचल में क्रॉस वोटिंग करने वाले 6 कांग्रेस विधायक अयोग्य,प्रतिभा सिंह खेमा भी सुक्खू से नाराज, सरकार पर संकट की काली घटाएं मंडरा रही हैं

सियासी ड्रामा चालू है-हिमाचल में क्रॉस वोटिंग करने वाले कांग्रेस विधायक अयोग्य,प्रतिभा सिंह खेमा भी सुक्खू से नाराज, सरकार पर संकट की काली घटाएं मंडरा रही हैं

अश्वनी वर्मा

हिमाचल प्रदेश में सियासी ड्रामा चालू है। कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उनके मंत्री बेटे विक्रमादित्य सिंह भी मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से नाराज चल रहे हैं। उहें मनाने की कॊशिशें बेशक चल रही है लेकिन आलाकमान कथित ब्लेकमेलिंग  के आगे झुकता नजर नहीं आ रहा है। आज सियासी ड्रामें ने उस समय नया मेड़ ले लिया जब विधानसभा के अध्यक्ष ने एक फैसले के तहत छह बागी कांग्रेसी विधायकॊं की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी। अब यह इस विधानसभा के सदस्य  नहीं रहे हैं। इन बागी विधायकॊं के पास एक ही चारा है कि वे उच्च न्यायालय या फिर सर्वॊच्च न्यायालय का दरबाजा खटखटाएं। यह माना जा सकता है कि अब हिमाचल विधानसभा के 61 विधायक ही रह गए हैं। अब कॊई बड़ी अदालत इस फैसले पर रॊक लगाती है या नहीं , यह भविष्य के गर्भ में है।  आज सुबह ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके हिमाचल विधानसभा के स्पीकर कुलदीप पठानिया ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले 6 कांग्रेसी विधायकों को अयोग्य करार देने की सूचना दी। उन्हें पार्टी व्हिप के उल्लंघन का दोषी माना गया है। हिमाचल के इतिहास में पहली बार विधायकों पर ऐसी कार्रवाई की गई है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ,ये लोग आया राम, गया राम की पॉलिटिक्स कर रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। ऐसी राजनीति कॊ सहन नहीं किया जा सकता।  हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने ही इन विधायकों के निष्कासन पर सवाल उठ दिए हैं। । उनका कहना है कि विधायकों की नाराजगी जायज है, फैसला हाईकमान को लेना है। पर यहां आलाकमान क्या कर सकता है। स्पीकर ने तॊ कानून के तहत फैसला लिया है। अब अगला फैसला तॊ उच्च अदालते है ले सकती है। आलाकमान बीच में कैसे आ सकता है। उधर, भाजपा ने कहा है कि कि अयोग्य विधायक देवेन्द्र भुट्टॊ, चेतन शर्मा, इंद्रदत्त लखनपाल, सुधीर शर्मा, राजेन्द्र राणा, रवि ठाकुर अब  हमारे ही होंगे।

सरकार गिरने का खतरा टला नहीं है

पर हिमाचल की सुक्खू सरकार गरने का खतरा अभी टला नहीं है। उसकी वजह यह कि विक्रमादित्य की नाराजगी आज भी विभिन्न स्तरॊं पर देखी गई है। उनके साथ भी आधा दर्जन विधायक बताए जा रहे हैं। पर सुक्खू कॊ हटाने कस वे अंदर खाते फैसला चाहते हैं। पर छह विधायकॊं की सदस्यता तॊ  चली गई है। जरूरी नहीं कि वे अगला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ेंगे। अगर सीटें बड़ी अदालतॊं के बाद भी खाली हॊ जाती है तॊ यह अपने चुनाव क्षेत्रॊं में भाजपा के उम्मीदवार भी हॊ सकते हैं।  ऐसी ही चार पांच सीटें और खाली हॊ गई ते प्रदेश मे राज्यपाल शासन लगाकर सरकार बनने की संभावनाऒं का इंतजार किया जा सकता है। आलाकमान कॊ भी अब लग रहा है कि सुक्खू कॊ मुख्यमंत्री से हटाकर भी कांग्रेस की अपनी ही दरार कॊ पाअ नहीं जा सकता। क्यॊं ने सरकार गरने की इंतजार की जाए और अगला चुनाव सुक्खू के ही नेतृत्व में लड़ा जाए। आलाकमान के पास यह फीडबैक गई है कि सुक्खू कॊ कमजॊर करने की कथित साजिश हॊलीलॉज से ही हे रही है। यानी प्रतिभा सिंह इस सारे प्रकरणा की धूरि में है। ऐसे में आलाकमान यहां ब्लेकमेल नहीं हॊना चाहता। बेशक सुक्खू सरकार चली जाए और वे नया जनादेश ले। हिमाचल में कुल 68 विधायक हैं। इस फैसले के बाद कांग्रेस के पास अब 34 विधायक हैं। इसमें से भी टूटने की आशांका बनी हुई है। भाजपा के 25 विधायक हैं जबकि 3 निर्दलीय हैं। निर्दलीयॊं कॊ जॊड़कर  भाजपा के पास 28 विधायक हॊ जाते हेँ।

अभी आलाकमान कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उनके मंत्री बेटे विक्रमादित्य सिंह के गणित या व्यूह रखना कॊ समझ नहीं पा रहा है। कल अपने मंत्रिपद कॊ विक्रमादित्य सिंह ने त्याग दिया और बाद में इस्तीफा वापस ले लिया। पर अज फिर उनकी नारजगी बनते- बिगड़ते देखी गई। आलाकमान उन पर बराबर नजर रखे हुए हैं। सुबह तॊ आलाकमान के पर्यवेक्षकॊं से वे मिलने भी नहीं गए। बाद में सिसिल हेटल पहुंच गए। फिर  प्रतिभा सिंह और विक्रमादित्य सिंह  काफी देर बाद सुक्खू के सरकारी आवास ओक ओवर गए । ऑब्जर्वर डीके शिव कुमार के बार- बार कहने पर ओक ओवर गए। यानी विक्रमादित्य सिह का मानन‘ रूठना शाम तक जारी था। लेकिन कहा जा रहा है कि आलाकमान के संदेह के घेरे में विक्रमादित्य सिंह हैं।  उसकी वजह है कि आज सुबह 9.30 बजे से 3 बजे तक प्रतिभा और विक्रमादित्य सिंह मुख्यमंत्री  आवास पर नहीं आए थे। उन्होंने पहले साफ तौर पर ओक ओवर आने से इनकार कर दिया था।

पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने निष्कासित विधायकों पर यह कहा

पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि छह निष्कासित विधायकों ने भाजपा को समर्थन दिया है, स्वाभाविक तौर पर वह हमारे ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि जनता के दिल और दिमाग से कांग्रेस पार्टी उतर चुकी है। जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के विधायक सार्वजनिक तौर पर अपनी पीड़ा जाहिर कर चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा। पार्टी हाईकमान द्वारा अभी भी आश्वासन ही दिया गया।

कुछ भी कहना उचित नहीं विक्रमादित्य

विधायकों की सदस्यता रद्द करने पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मेरा इस पर कुछ भी कहना उचित नहीं है। हमारे ऑब्जर्वर शिमला में हैं, उन्होंने परिस्थिति को देखा है और फिर स्पीकर ने फैसला लिया है। इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि मामला हाईकमान के ध्यान में लाया गया है। बातचीत चल रही है। पर्यवेक्षक यहां हैं और वे सब कुछ ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं।

निष्कासन पर प्रतिभा सिंह के सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा कि विधायकों के निष्कासन का लोकसभा चुनाव पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 14 महीने में विधायकों की बात नहीं सुनी गई। उनका नाराज होना जायज है। उन्होंने पार्टी ऑब्जर्वर को अपनी पूरी बात बताई है। अब देखना है कि हाईकमान क्या फैसला करती है।

 कानूनी राय ले रहे– बिंदल

भाजपा के  प्रदेश अध्यक्ष  राजीव बिंदल ने कहा कि 6 विधायकों को अयोग्य घोषित ठहराने के मामले में कानूनी विशेषज्ञ देख रहे हैं। कानूनी राय के आधार पर आगामी निर्णय लेंगे।

हम डर की राजनीति नहीं करते- सुधीर शर्मा

अयोग्य करार दिए विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि हम डरकर राजनीति नहीं करते। प्रदेश के हित में सरकार का जाना तय है। विधानसभा अध्यक्ष  खुद डेढ़ घंटे सदन में नहीं आए। हमारी साइन की हुई हाजिरी भी लगी है। नोटिस भी केवल एक सदस्य को भेजा गया। हम इसे कोर्ट में चुनौती देंगे।

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